गुरुवार, सितंबर 10, 2026

जन्मदिन-2026

 इस बार के जन्मदिन का किस्सा मज़ेदार है।आजकल सबके अलग-अलग ह्वाट्सऐप ग्रुप हैं…. घर परिवार का तो है ही;इसके अलावा स्कूल ग्रुप कोलेज ग्रुप,ऑफिस ग्रुप, साथ की पोस्टिंग वाला ग्रुप, आफिस की महिला सहकर्मियों का ग्रुप, और ऐसे ही तमाम समूह।मेरा भी है।अनेक समूहों में से एक स्कूल के दोस्तों का है जहाँ शायद मैं सबसे सक्रिय हूँ।आख़िर पाँच साल की उम्र में हममें से कई लोग किंडरगार्टेन में साथ साथ ही बिब लगाकर पहली बार स्कूल आए थे।और अब तक साथ हैं।

एक बात और ख़ास है आजकल के ज़माने में।पहले तो जन्मदिन,शादी की सालगिरह,फ़ोन नंबर सब मुँहजबानी याद रहते थे।बहुत होते भी नहीं थे याद रखने के लिए।अब अगर आपने फेसबुक पर डाल दिया तो सबको याद है या कोई एक सदस्य इसकी ज़िम्मेदारी ले लेता है और सब उसी की अगुवाई पर बधाई देते हैं।अगर उससे चूक हो गई तो बस सबसे चूक गया।
इस बार ऐसा ही कुछ हुआ।हमने फेसबुक से यह तारीख हटा दी है, लिहाज़ा यहाँ से कोई सूचना नहीं मिलती। अगर किसी और को याद नहीं और आप मुबारकें चाहते हैं तो आप ख़ुद ही याद दिला दें।
बहुत दिनों से हम लोग मिले नहीं थे।कुछ ऐसा हुआ है की यह ज़िम्मेदारी मेरी बनने लग गई है।हमने भी कुछ फ़ोन मिलाए,संदेश डाले और जन्मदिन का दिन नियत किया चाय-काफ़ी पर मिलने का।इस बात का मैंने ज़िक्र नहीं किया कि वह दिन ख़ास है और न किसी को याद रहा। @यह सब जुगत बस एक दिन पहले ही गई।लखनऊ जैसे शहर में रहने का यह फ़ायदा है कि अगर आप कुछ प्लान बनाते हैं तो दूरी ज़्यादा नहीं होने से पहुँचने में बहुत आसानी होती है।
हर बार हम एक नया रेस्टोरेंट ढूँढते है।इस बार हमारी नज़र रुकी हज़रतगंज स्थित पेंटहाउस पर।हज़रतगंज बिल्कुल बीच मैं है इसलिए आने में सबको सुविधा होती है ।वैसे भी मेरा तो ऑल गर्ल्स स्कूल था।तो जब हम “गर्ल्स” इकट्ठा होते हैं तो ध्यान रखना पड़ता है कि किसी को असुविधा तो नहीं है।वैसे अब हम सब साठ की उमर पार कर चुकी हैं तो घर की बोझ काफ़ी हल्का हो गया है फिर भी कुछ न कुछ तो लगा रहता है।
खैर जन्मदिन आया।हमने व्हाट्सऐप खोला।बाक़ी सभी ग्रुप में बधाई संदेश आते जा रहे हैं सिवाय इस एक ग्रुप के। चूक गया कोई।हमने भी चुप्पी साध ली। मुझे विश्वास था की किसी को तो याद आ जाएगा। खैर, पाँच बजे मिलना था और व्यवस्था देखने के लिए हम दस मिनट पहले ही पहुँच गए।
तब कोई संदेश नहीं!!! अब जब सब इकट्ठा हुए तो ……. हो गए सब लाइन हाज़िर।सबकी पट्टी परेड। सबको स्कूल के हिसाब से ब्लैक मार्क्स।सबको लानतें।सबको डिटेंशन।सबको टाइमआउट। सबकी गिल्ट, सबका मनाना और फिर इस ग़फ़लत की भरपाई करना। क्या लाद क्या दुलार।और फिर व्हाट्सऐप ग्रुप पर भी चालू हो गया।
मज़ा आ गया, मज़ा! और फिर क्या गिफ्ट हमने दिया जन्मदिन पर अपने आप को।अपने दोस्तों का साथ। दुनिया की महंगी से महंगी वस्तु इस तोहफे के सामने चींटी हैं, चींटी।नगण्य,तुच्छ, धूल। और फिर वी शाम हुई कि जन्मदिन यादगार हो गया।
ऐसे ही भूलते रहो,याद रखते रहो, मिलते रहो,हँसते हंसाते रहो। साठ से भी दो साल ऊपर में सोलह का स्वाद आ गया।