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शुक्रवार, मार्च 30, 2012

सिम्बा

आज सिम्बा बहुत  नाराज़ है.घर में मेहमान आये हैं और उसे हमने बाहर छत  पर भगा दिया है. वह जाली के दरवाज़े से सबको देख तो रहा है पर चाह कर भी अन्दर नहीं आ पा रहा है. उसे सबके साथ बैठना बहुत पसंद है. सबको हेलो कर वह अपने एक किनारे बैठ जाता है. पर कुछ लोग हैं जो उसके बड़े शरीर को देख डर  जाते हैं.उसके अन्दर  के कोमल दिल को नहीं देख पाते हैं. अमूमन ,उसकी डीलडौल  से उसके नाज़ुक गर्मजोश   दिल को पहचान पाना ज़रा मुश्किल होता है. पहली नज़र में कोई भी सहम जाता है. सिम्बा के समझ से यह बात परे है.वह तो गले मिलकर सबका अभिवादन करता है ,और सबसे थोड़ी जानपहचान हो जाने पर , अकेले ही बैठना पसंद करता है. पर अभी वह इसी बात से दुखी है और गुस्सा भी.आखिर उसे क्यों सबसे मिलने नहीं दिया जा रहा ? उसे कौन समझाए की घर आया महमान उसके साथ मेलजोल बढ़ने में हिचक रहा है .
मुझे पता है क्या होने वाला है.मेहमान तो चले  जायेंगे और सिम्बा मुंह फुलाकर नाराज़ हो जाएगा.फिर लाख मनाने पर भी वह अन्दर नहीं आने वाला. मैं उसे बुलाने जाउंगी तो मुंह फेर  लेगा . अन्दर आएगा पर अपने हिसाब से. वह एस ही करता है अगर उसकी कोई भी ख्वाहिश पूरे करने में ज़रा देर हो जाए. सवेरे उठाकर उसे घूमने जाना पसंद है.घड़ी में ठीक छह बजाते ही वह हमारे आसपास चहलकदमी करने लग जाता है. जब तक हम कपडे बदले ,जूते पहने तब तक तो ठीक पर अगर कुछ भी और काम करने लगे तो सिम्बा जी नाराज़.फिर बहुत मनाना पड़ता है उन्हें बाहर चलने के  लिए. ऐसा ही करता है जब उसे सवेरे की दूध रोटी समय से नहीं मिलती .जैसे ही घूम  कर वापस आया  तो सीधे अपने  खाने की प्लेट के पास पहुँच जाता है. मैं  कहती हूँ  की थोड़ा तो समय लगेगा घर के अन्दर आकर तुम्हारी दूध रोटी डालने में पर वह बेसब्र है .कुह्ह देर रसोई  के सामने खड़ा रहेगा और फिर अगर मैंने नहीं दिया  तो मुंह फुलाकर वहीं ज़मीन पर लेट जाएगा. और फिर जब उसका मन करेगा तब सुबह का नाशता करेगा .
 वैसे उसे घूमना पसंद है.हम उसे घुमक्कड़  कहते हैं. घुमक्कड़ और खोजी .जब तक सूंघ सूंघ कर किसी चीज़ की पूरी जानकारी नहीं ले  लेता उसे चैन नहीं . उसके साथ घूमने का मतलब है हर एक कदम पर रुकना.वह उस जगह को सूंघेगा और कभी कभी तो मुझे लगता है किसी गड़े खजाने की महक लग जाती है उसे.सूंघेगा ,एक पैर से ज़रा ज़मीन खोदेगा ,फिर सूंघेगा और आगे बढ़ने को राजी नहीं. जब उसे तसल्ली हो जाती है की उस जगह की हर खुशबू-बदबू से वह वाकिफ हो गया है तभी आगे बढ़ता है. यह घड़ी घड़ी रुक रुक कर सैर करने में सिर्फ उसे ही मज़ा आ सकता है. उसे कार में बाहर जाना भी पसंद है. अगर हम कार से कहीं जा रहे हों ,ख़ास तौर से दूसरे शहर तो हम कोशिश करते हैं की ऐसी जगह रहे जहां कुत्ते को भी साथ रखने  की इजाज़त हो. वह कार में पीछे बैठकर पूरे सफ़र का मज़ा लेता है. कभी खड़ा हो जाता है,कभी सीट पर बैठकर , खिड़की से मुंह चिपकाकर बाहर देखता रहता है. रास्ते  भर हम लोगों के आकर्षण का केंद्र रहते हैं. आने जाने वाला ट्रेफिक,गाडी में इतने बड़े कुत्ते को देख कौतुक होता है. यात्रा के बाद घर वापस आने पर हम सब थके हो सकते हैं पर सिम्बा नहीं.उसे गाडी से उतरने में कोइ दिलचस्पी नहीं रहती है.बल्कि उतर कर अपना थोड़ा इधर उधर घूम कर वह फिर गाडी के पास खड़ा हो जाता है !हमें लगता है कि पीछे छोटी जगह में वह बड़ा बंधा सा महसूस कर रहा होगा और लम्बे सफ़र में थक गया होगा.पर सिम्बा तो उतरने को राजी नहीं.
वैसे अगर हम ऐसी जगह जा रहे होते हैं जहां सिम्बा को ले जाना संभव नहीं तो उसे घर पर छोड़ना ,अपने बच्चे को छोड़ने के बराबर होता है. जैसे ही हम सूटकेस वगैरह बाँध रहे होते हैं ,या जूते पहने कि सिम्बा को आभास हो जाता है कि हम कहीं निकलने वाले हैं.वह भी पूंछ हिलाता आसपास मंडराने लगता है. पर अगर उसका सामान न रखा गया तो उसे पता है कि वह तो साथ नहीं जा रहा . हम तो भावुक रहते ही हैं ,सिम्बा भी मायूस हो कर पूंछ नीचे चिपका कर रोनी सूरत लिए बैठ जता है.
कसौली में सिम्बा 

कैमरे के लिए पोज़ 
गजब का जज्बाती है . कहीं से बहुत दिनों के बाद आने पर वह ऐसे मिलता है जैसे न मिलने की आशा पर दुबारा मिल जाएँ.बेतहाशा चिपक  कर,गले लग कर वह आपके वहां होने का  एहसास    अपने में समेटता है. लाड प्यार जता कर ,तसल्ली कर कि वाकई आप हैं,फिर वह चुपचाप एक कोने में बैठ जायेगा. पर रह रह कर वह आकर प्यार करता है कि इस बीच आप चले तो नहीं गए.
अभी तो उसे बुखार है  सर्दी खांसी,गला खराब. छोटे बच्चे की तरह वह गोद में बैठा  रहा . गले में खराशहै  ,खाना भी नहीं खा रहा है.जिद है कि मैं अपने हाथ से उसे खिलाऊँ. सहलाती रहूँ ,उसके बालों में हाथ फेरती रहूँ.मेरे  पीछे पीछे घूम रहा है. जल्दी से ठीक हो जाए तो चैन आये . डोक्टर के पास ले गयी.कल उसे सुई लगी तो कुछ नहीं बोला .पर आज दुबारा जब ले गयी तो उसे दर्द याद आया और थोडा छिटकने लगा.
सिम्बा सेंत बर्नार्ड है .बड़ी कदकाठी का ,बेहद ही कोमल मिजाज़ का  ,भावुक ,स्नेहपूर्ण नस्ल का प्राणी है.अब हमें तलाश है उसकी हमसफ़र की .