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सोमवार, दिसंबर 16, 2013

'sabaaeedee '..... नमस्कार लाओ में आपका स्वागत है

थाईलेंड  ,कम्बोडिया ,वियतनाम और  चीन से घिरे इस देश में शायद सैलानी के तौर पर जाने की बात हमारे ज़हन में न आये ,पर आफिस के काम से मुझे वहां जाने का मौका मिला. दिल्ली से बेंगकोक और फिर वहां से लाओ एरलाईन से पाक्से . बंगकोक से एक छोटे एटीआर जहाज से हम पहुंचे पाक्से .हवाई अड्डा क्या था बस एक रनवे और दो कमरों की इमारत. दक्षिणी लाओ के चम्पासक प्रदेश की राजधानी है यह छोटा सा शहर . हमारे बस एक दिन का समय था सो घूमना तो ज्यादा नहीं हो पाया ..हाँ कुछ चित्र ज़रूर उतारे.

पाक्से का हवाई अड्डा जहाँ उड़ानें सिर्फ बंगकोक और लाओ की राजधानी वियांतियाँ तक जाती हैं  .



होटल के कमरे से दिखती मेकोंग नदी.यह शहर दो नदियों सी दोन औए मेकोंग के संगम पर स्तिथ है.चीन से आती हुयी मेकोंग चौड़ी है और बहुत ही सुन्दर .

सूर्यास्त .यह पुल जापानी सहायता से बनाया गया  है .सवेरे इस पुल पर टहलना और नीचे शांत बहती नदी को देखना .

गुरुवार, अगस्त 26, 2010

सबाएदी ..लाओ में आपका स्वागत है !

दक्षिण पूर्वी एशिया में म्यन्मार, थाईलेंड,वियतनाम ,कम्बोडिया और चीन के बीच स्थित  लाओ या फिर लाओस .दिल्ली से बैंगकॉक  और फिर वहां से  लाओ एरलाईन के विमान से पाक्से .पाक्से लाओ के दक्षिण के प्रांत चम्पासक की राजधानी है और वहां का एक प्रमुख शहर .'से' नदी पर स्थित  होने के कारण इसका नाम है पाक्से . लेकिन यहाँ पर एक और नदी 'मेकोंग ' भी बहती है जो लाओ की सबसे बड़ी नदी  है .

मीकोंग़ पर  अस्ताचल सूरज


मेकोंग  नदी पर पुल जापानी सहायता से बनाया गया है सवेरे उठकर यहाँ बहुत से लोग टहलते या जोग करते दिखे.


होटल के कमरे से शहर  का दृश्य .










जहां भी जाएं भारतीय मिल ही जायेंगे.यहाँ पर मिला निजाम रेस्तारांत जो एक तमिल भाई ने वहां खोला था और उसे चला रहा था नेपाल का रहने वाला  कृष्णा.रात का भोजन यहाँ पर ही किया .


वीसा के लिए फोटो चाहिए था सो पहुँच गए इस दूकान में जहां १० मिनट में  डिजिटल तस्वीर निकाल दी.यहाँ पर रुपये के लिए चलता है " कीप "और ८००० कीप एक डॉलर के बराबर हैं. १००० कीप से कम का कोई नोट नहीं. सोचिये वहां की अर्थव्यवस्था किस हाल में है .






लाओ प्रसिद्ध है सिल्क के लिए.यहाँ के हाथ से बुने सिल्क दुनिया भर में मशहूर है. डिजाइन औ रंग देखने लायक थे.हमने भी सिल्क का कपड़ा  और एक दुपट्टा लिया .

दूसरे दिन हमें मौका मिला पाक्से करीब २८० किमी दूर एक और प्रान्त अत्तापू जाने का.लाओस अधिकांशत: ग्रामीण अंचल देश है और  यहाँ जंगल और हरियाली बहुत है. हरे भरे रास्ते को देख सुकून मिला. यहाँ जनसंख्या कम है सो दिखे कम लोग पर जो मिला मुस्करा रहा था. लकड़ी और सिल्क यहाँ के मुख्य आयात हैं.  

लाओस में बुद्ध धर्म के अनुयायी हैं सो जगह जगह बुद्ध  मंदिर देखने को मिलते हैं.पाक्से में ऐसा ही एक मंदिर .