Thursday, November 06, 2014

Farewell Allahabad


2 comments:

parul chaturvedi bhardwaj said...

That was so beautifully put bua. I totally lived it through your words. I hope you create even better memories wherever you go next.
Ps: hope you conquer the golf course too!

yunus khan said...

अभी बस अभी सुना। और बेहद जज्‍बाती हो गए हम। आह और वाह से लबरेज़। अदभुत। बेमिसाल। शानदार। बहुत ही सहज। ज़रा भी बनावट नहीं। और एक एक लफ्ज़ धड़क रहा है।
आह और वाह। सब छूटे हुए शहर याद आ गए। 'हम से जो छूट गए अब वो शहर कैसे हैं/ शाख़े गुल कैसी है खुश्‍ूबू के नगर कैसे हैं'। आपने आंखें भिगो दीं सुबह-सुबह।